Lord Mahavir in Hindi

अगर आपको खुश रहना है

अगर आपको खुश रहना है तो दो चीजे हमेशा याद रखो-भगवान और अपनी मौत.
– Lord Mahavir

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किसी आत्मा की सबसे बड़ी भूल

किसी आत्मा की सबसे बड़ी भूल खुद के असली रूप को नहीं पहचानना है और यह ज्ञान से ही प्राप्त हो सकती है.
– Lord Mahavir

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क्रोध को जन्म देता है

क्रोध हमेशा अधिक क्रोध को जन्म देता है और क्षमा और प्रेम हमेशा अधिक क्षमा और प्रेम को जन्म देते हैं.
– Lord Mahavir

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आत्मा अकेली आती है

आत्मा अकेली आती है और अकेली जाती है उसका न कोई साथ देता है और न ही मित्र बनता है.
– Lord Mahavir

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धैर्य रखना चाहिए

कठिन परिस्थितयो में घबराना नहीं चाहिए बल्कि धैर्य रखना चाहिए.
– Lord Mahavir

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प्रत्येक जीव आजाद है

प्रत्येक जीव आजाद है और कोई किसी पर निर्भर नहीं करता.
– Lord Mahavir

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सम्मान रखना अहिंसा है

सभी जीवों के प्रति सम्मान रखना अहिंसा है.
– Lord Mahavir

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शांति और आत्म-नियंत्रण

शांति और आत्म-नियंत्रण अहिंसा है.
– Lord Mahavir

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पर्यावरण का महत्वपूर्ण सिद्धांत

पर्यावरण का महत्वपूर्ण सिद्धांत यह है कि एक आप ही इसके अकेले तत्व नहीं हो.
– Lord Mahavir

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सबसे बड़ा धर्म

सबसे बड़ा धर्म अहिंसा है.
– Lord Mahavir

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सर्वनाश होता है

हर जीवित व्यक्ति के प्रति दया भाव रखो,घृणा करने से तो सर्वनाश होता है.
– Lord Mahavir

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विद्या फलदायी नहीं होती

जिस प्रकार बिना जल के धान नहीं उगता उसी प्रकार बिना विनय के प्राप्त की गई विद्या फलदायी नहीं होती।
– Lord Mahavir

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गलती अपने असल रूप को ना पहचानना है

किसी आत्मा की सबसे बड़ी गलती अपने असल रूप को ना पहचानना है , और यह केवल आत्म ज्ञान प्राप्त कर के ठीक की जा सकती है .
– Lord Mahavir

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प्रत्येक जीव स्वतंत्र है

प्रत्येक जीव स्वतंत्र है . कोई किसी और पर निर्भर नहीं करता .
– Lord Mahavir

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आनंद बाहर से नहीं आता

प्रत्येक आत्मा स्वयं में सर्वज्ञ और आनंदमय है . आनंद बाहर से नहीं आता .
– Lord Mahavir

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घृणा से विनाश होता है

हर एक जीवित प्राणी के प्रति दया रखो . घृणा से विनाश होता है .
– Lord Mahavir

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आत्मा अकेले आती है

आत्मा अकेले आती है अकेले चली जाती है , न कोई उसका साथ देता है न कोई उसका मित्र बनता है .
– Lord Mahavir

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खुद पर विजय प्राप्त करना

खुद पर विजय प्राप्त करना लाखों शत्रुओं पर विजय पाने से बेहतर है .
– Lord Mahavir

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आपकी आत्मा से परे कोई भी शत्रु नहीं है

आपकी आत्मा से परे कोई भी शत्रु नहीं है . असली शत्रु आपके भीतर रहते हैं , वो शत्रु हैं क्रोध , घमंड , लालच ,आसक्ति और नफरत .
– Lord Mahavir

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स्वयं से लड़ो

स्वयं से लड़ो , बाहरी दुश्मन से क्या लड़ना ? वह जो स्वयम पर विजय कर लेगा उसे आनंद की प्राप्ति होगी .
– Lord Mahavir

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