Shriram Sharma Acharya in Hindi

अवसर तो सभी को जिन्‍दगी में मिलते हैं

अवसर तो सभी को जिन्‍दगी में मिलते हैं, किंतु उनका सही वक्‍त पर सही तरीके से इस्‍तेमाल कुछ ही कर पाते हैं।
– Shriram Sharma Acharya

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इस्‍तेमाल कुछ ही कर पाते हैं

अवसर तो सभी को जिन्‍दगी में मिलते हैं, किंतु उनका सही वक्‍त पर सही तरीके से इस्‍तेमाल कुछ ही कर पाते हैं।
– Shriram Sharma Acharya

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विकास नहीं होता

इस संसार में प्यार करने लायक दो वस्तुएँ हैं-एक दुख और दूसरा श्रम। दुख के बिना हृदय निर्मल नहीं होता और श्रम के बिना मनुष्यत्व का विकास नहीं होता।
– Shriram Sharma Acharya

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असफल होते हैं

जीवन में दो ही व्यक्ति असफल होते हैं- एक वे जो सोचते हैं पर करते नहीं, दूसरे जो करते हैं पर सोचते नहीं।
– Shriram Sharma Acharya

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विचारों के अन्दर बहुत बड़ी शक्ति होती है

विचारों के अन्दर बहुत बड़ी शक्ति होती है । विचार आदमी को गिरा सकतें है और विचार ही आदमी को उठा सकतें है । आदमी कुछ नहीं हैं ।
– Shriram Sharma Acharya

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जब हम ऐसा सोचते हैं

जब हम ऐसा सोचते हैं की अपने स्वार्थ की पूर्ती में कोई आंच न आने दी जाय और दूसरों से अनुचित लाभ उठा लें तो वैसी ही आकांक्षा दूसरे भी हम से क्यों न करेंगे।
– Shriram Sharma Acharya

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लक्ष्य के अनुरूप भाव उदय होता है

लक्ष्य के अनुरूप भाव उदय होता है तथा उसी स्तर का प्रभाव क्रिया में पैदा होता है।
– Shriram Sharma Acharya

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लोभी मनुष्य

लोभी मनुष्य की कामना कभी पूर्ण नहीं होती।
– Shriram Sharma Acharya

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मानव के कार्य

मानव के कार्य ही उसके विचारों की सर्व श्रेष्ठ व्याख्या है।
– Shriram Sharma Acharya

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संसार में सफल नहीं हो सकता

अव्यवस्तिथ मस्तिष्क वाला कोई भी व्यक्ति संसार में सफल नहीं हो सकता।
– Shriram Sharma Acharya

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आत्मा विश्वास उतना ही ज़रूरी है

जीवन में सफलता पाने के लिए आत्मा विश्वास उतना ही ज़रूरी है ,जितना जीने के लिए भोजन। कोई भी सफलता बिना आत्मा विश्वास के मिलना असंभव है।
– Shriram Sharma Acharya

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जीवन एक पाठशाला है

जीवन एक पाठशाला है , जिसमें अनुभवों के आधार पर हम शिक्षा प्राप्त करते हैं।
– Shriram Sharma Acharya

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संसार में कोई रिश्ता है

पात्रता विकास के बिना न संसार में कोई रिश्ता है और न इसके बिना अध्यात्म क्षेत्र में कोई रास्ता है।
– Shriram Sharma Acharya

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साधन उपलब्ध कर सकेंगे

अगले दिनों संसार में एक भी व्यक्ति अमीर न रह सकेगा। पैसा बँट जायेगा , पूँजी पर समाज का नियंत्रण होगा और हम सभी केवल निर्वाह मात्र के अर्थ साधन उपलब्ध कर सकेंगे।
– Shriram Sharma Acharya

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राग और द्वेष

राग और द्वेष , स्वार्थ और संगर्ष के जन्मदाता है।
– Shriram Sharma Acharya

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जैसा मज़बूत बना देते हैं

संकट या तो मनुष्य को तोड़ देते हैं या उसे चट्टान जैसा मज़बूत बना देते हैं।
– Shriram Sharma Acharya

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बुद्धिमान माली की तरह है

ईश्वरीय नियम उस बुद्धिमान माली की तरह है जो बेकार घास -कूड़े को उखाड़ कर फेंक देता है और योग्य पौधों को भरपूर साज संभाल कर उन्हें उन्नत बनता है।
– Shriram Sharma Acharya

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सुंदरता अधिक महत्व रखती है

तन की सुंदरता से मन की सुंदरता अधिक महत्व रखती है।
– Shriram Sharma Acharya

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सबसे बड़ा दीन दुर्बल वह है

सबसे बड़ा दीन दुर्बल वह है , जिसका अपने ऊपर नियन्त्रण नहीं।
– Shriram Sharma Acharya

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संभावनाएं समाप्त हो जाती हैं

अपना धर्म , अपनी संस्कृति अथवा अपनी सभ्यता छोड़कर दूसरों की नक़ल करने से कल्याण की संभावनाएं समाप्त हो जाती हैं।
– Shriram Sharma Acharya

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